श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.151.6 
द्रोण उवाच
दुर्योधन किमेवं मां वाक्शरैरपि कृन्तसि।
अजय्यं सततं संख्ये ब्रुवाणं सव्यसाचिनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले - दुर्योधन! तुम मुझे अपने वचन रूपी बाणों से क्यों बींध रहे हो? मैंने सदैव कहा है कि धर्मात्मा और बुद्धिमान अर्जुन युद्ध में अजेय है।
 
Dronacharya said - Duryodhan! Why are you piercing me with the arrows of your words? I have always said that Arjuna, who is virtuous and wise, is invincible in battle.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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