श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.151.5 
द्रोणस्तु तद् वच: श्रुत्वा पुत्रस्य तव दुर्मना:।
मुहूर्तमिव तद् ध्यात्वा भृशमार्तोऽभ्यभाषत॥ ५॥
 
 
अनुवाद
आपके पुत्र की उपरोक्त बातें सुनकर द्रोणाचार्य मन ही मन दुःखी हुए और कुछ देर तक विचार करने के बाद उन्होंने बड़े दुःखी स्वर में यह बात कही।
 
Hearing the above words of your son, Dronacharya became sad in his heart. After thinking for a while, he said this in a very sad tone.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)