श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.151.34 
नाहत्वा सर्वपञ्चालान् कवचस्य विमोक्षणम्।
कर्तास्मि समरे कर्म धार्तराष्ट्र हितं तव॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन! अब मैं अपना कवच तब तक नहीं उतारूँगा जब तक कि समस्त पांचालों का वध न कर दूँ। मैं युद्धभूमि में केवल वही कार्य करूँगा जिससे तुम्हारा हित हो। 34.
 
Duryodhan! Now I will not remove my armour until I have killed all the Panchalas. I will do only that thing in the battlefield which will benefit you. 34.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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