Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.151.31-32: हे कुरुपुत्र! हे राजन! जब से मैंने देखा है कि अत्यन्त कठिन कर्म करने वाले भीष्म, जिन्हें इन्द्र सहित समस्त देवता भी नहीं मार सके, आपके छोटे भाई दु:शासन के सामने मारे जा रहे हैं, तब से मैं यही सोच रहा हूँ कि यह पृथ्वी अब आपके वश में नहीं रह सकती।॥31-32॥ | mahabharat अध्याय 7.151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कुरुपुत्र! हे राजन! जब से मैंने देखा है कि अत्यन्त कठिन कर्म करने वाले भीष्म, जिन्हें इन्द्र सहित समस्त देवता भी नहीं मार सके, आपके छोटे भाई दु:शासन के सामने मारे जा रहे हैं, तब से मैं यही सोच रहा हूँ कि यह पृथ्वी अब आपके वश में नहीं रह सकती।॥31-32॥
O son of Kuru! O King! Ever since I have seen that Bhishma, who performed the most difficult deeds, who could not be killed even by all the gods including Indra, being killed in the presence of your younger brother Dushasan, I have been thinking that this earth cannot remain in your control anymore. ॥ 31-32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥