| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान » श्लोक 28 |
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| | | | श्लोक 7.151.28  | सौवर्णं सत्यसंधस्य ध्वजमक्लिष्टकर्मण:।
अपश्यन् युधि भीष्मस्य कथमाशंससे जयम्॥ २८॥ | | | | | | अनुवाद | | जिन्होंने अनायास ही महान् कर्म किये हैं, उन भीष्म की स्वर्णमयी ध्वजा को रणभूमि में लहराता हुआ न देखकर भी तुम विजय की आशा कैसे करते हो? 28॥ | | | | How do you hope for victory even after not seeing the golden flag of Bhishma, the one who has committed great deeds without any effort, flying in the battlefield? 28॥ | | ✨ ai-generated | | |
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