श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 151: द्रोणाचार्यका दुर्योधनको उत्तर और युद्धके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.151.1 
धृतराष्ट्र उवाच
सिन्धुराजे हते तात समरे सव्यसाचिना।
तथैव भूरिश्रवसि किमासीद् वो मनस्तदा॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने कहा- तात! जिस समय सव्यसाची अर्जुन ने सिन्धुराज जयद्रथ का और सात्यकि ने भूरिश्रवा का वध किया, उस समय आप लोगों की मनःस्थिति क्या थी?
 
Dhritarashtra said- Tat! What was the state of mind of you people at that time when Savyasachi Arjuna killed Sindhuraj Jayadratha and Satyaki killed Bhurishrava?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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