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श्लोक  7.149.61 
इत्युक्त्वा पाण्डवो राजन् युयुधानवृकोदरौ।
सस्वजे पुरुषव्याघ्रौ हर्षाद् वाष्पं मुमोच ह॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
राजन! पुरुषसिंह सात्यकि और भीमसेन से ऐसा कहकर पाण्डुनन्दन युधिष्ठिर ने उन दोनों को हृदय से लगा लिया और वे हर्ष के आँसू बहाने लगे॥61॥
 
Rajan! Saying this to Purushasimha Satyaki and Bhimasena, Pandunandan Yudhishthira embraced both of them in his heart and they started shedding tears of joy. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)