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mahabharat 7.149.52-54h: तत्पश्चात् महाबाहु भीमसेन और महारथी सात्यकि बाणों से घायल होकर भूमि पर खड़े होकर अपने अग्रज गुरु युधिष्ठिर को प्रणाम करने लगे। पांचालों से घिरे हुए उन दोनों महाधनुर्धर योद्धाओं को हाथ जोड़कर प्रसन्नतापूर्वक सामने खड़े देखकर कुन्तीकुमार युधिष्ठिर ने भीमसेन और सात्यकि दोनों को नमस्कार किया। 52-53 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.149: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 149: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन  »  श्लोक 52-54h
 
 
श्लोक  7.149.52-54h 
ततो भीमो महाबाहु: सात्यकिश्च महारथ:।
अभिवाद्य गुरुं ज्येष्ठं मार्गणै: क्षतविक्षतौ॥ ५२॥
क्षितावास्तां महेष्वासौ पाञ्चाल्यै: परिवारितौ।
तौ दृष्ट्वा मुदितौ वीरौ प्राञ्जली चाग्रत: स्थितौ॥ ५३॥
अभ्यनन्दत कौन्तेयस्तावुभौ भीमसात्यकी।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबाहु भीमसेन और महारथी सात्यकि बाणों से घायल होकर भूमि पर खड़े होकर अपने अग्रज गुरु युधिष्ठिर को प्रणाम करने लगे। पांचालों से घिरे हुए उन दोनों महाधनुर्धर योद्धाओं को हाथ जोड़कर प्रसन्नतापूर्वक सामने खड़े देखकर कुन्तीकुमार युधिष्ठिर ने भीमसेन और सात्यकि दोनों को नमस्कार किया। 52-53 1/2॥
 
Thereafter, the mighty-armed Bhimsen and the mighty charioteer Satyaki, wounded by the arrows, stood on the ground, paying obeisance to their elder guru Yudhishthira. Seeing those two great archer warriors surrounded by the Panchalas standing happily in front with folded hands, Kuntikumar Yudhishthir greeted both Bhima and Satyaki. 52-53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)