श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 149: श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे विजयका समाचार सुनाना और युधिष्ठिरद्वारा श्रीकृष्णकी स्तुति तथा अर्जुन, भीम एवं सात्यकिका अभिनन्दन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.149.2 
दिष्ट्या वर्धसि राजेन्द्र हतशत्रुर्नरोत्तम।
दिष्ट्या निस्तीर्णवांश्चैव प्रतिज्ञामनुजस्तव॥ २॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! सौभाग्य से तुम आगे बढ़ रहे हो। हे पुरुषोत्तम! तुम्हारा शत्रु मारा गया है। तुम्हारे छोटे भाई ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की है, यह बड़े सौभाग्य की बात है।'
 
‘Rajendra! Fortunately you are rising. Best of men! Your enemy has been killed. Your younger brother has fulfilled his promise, this is a matter of great fortune.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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