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श्लोक 7.147.91-92  |
शतशो निहता: शूरा: सात्वतेनार्जुनेन च॥ ९१॥
भीष्मं प्रमुखत: कृत्वा भगदत्तं च भारत।
एवमेष क्षयो वृत्तो राजन् दुर्मन्त्रिते तव॥ ९२॥ |
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| अनुवाद |
| भरत! इसी प्रकार सात्यकि और अर्जुन ने भी भीष्म और भगदत्त आदि सैकड़ों वीर योद्धाओं का वध कर दिया है। राजन! इस प्रकार यह विनाश-कार्य आपकी कुमति के फलस्वरूप सम्पन्न हुआ है॥ 91-92॥ |
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| Bharata! Similarly Satyaki and Arjuna have also killed hundreds of brave warriors like Bhishma and Bhagadatta. King! Thus this work of destruction has been accomplished as a result of your bad advice.॥ 91-92॥ |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि कर्णसात्यकियुद्धे सप्तचत्वारिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १४७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें कर्ण और सात्यकिका युद्धविषयक एक सौ सैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४७॥
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