श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  7.147.89 
उपाजह्रुस्तमास्थाय कर्णोऽप्यभ्यद्रवद् रिपून्।
एतत् ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन के सेवक रथ लेकर आये और कर्ण उस पर सवार होकर शत्रुओं पर टूट पड़ा। हे राजन! जो कुछ तुम मुझसे पूछ रहे थे, वह सब मैंने तुम्हें बता दिया है। 89.
 
Duryodhana's servants brought the chariot and Karna mounted it and attacked the enemies. O King, I have told you everything you were asking me. 89.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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