श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  7.147.88 
हेमकक्ष्याध्वजोपेतं क्लृप्तयन्त्रपताकिनम्।
अग्रॺं रथं सुयन्तारं बहुशस्त्रपरिच्छदम्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
उसमें स्वर्णिम रस्सी से आच्छादित ध्वज लहरा रहा था। वह रथ यंत्रों और पताकाओं से सुसज्जित था। उसमें अनेक अस्त्र-शस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुएँ रखी हुई थीं। उस उत्कृष्ट रथ का सारथि भी अत्यंत योग्य था। 88।
 
A flag covered with golden rope was fluttering in it. That chariot was decorated with machinery and banners. Many weapons and other necessary items were kept inside it. The charioteer of that excellent chariot was also very capable. 88.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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