श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  7.147.84 
चित्रकाञ्चनसंनाहैर्वाजिमुख्यैर्विशाम्पते।
घण्टाजालाकुलरवं शक्तितोमरविद्युतम्॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! वे घोड़े विचित्र स्वर्ण कवचों से विभूषित थे। वे सभी घोड़े उत्तम कोटि के थे। उनके द्वारा खींचा जाने वाला रथ छोटी-छोटी घंटियों के समूह से निकलने वाली मधुर ध्वनि से भर रहा था। वहाँ रखे हुए शक्ति और तोमर आदि अस्त्र विद्युत के समान चमक रहे थे।
 
O Prajanath! Those horses were adorned with strange golden armours. All those horses were of good quality. The chariot drawn by them was filled with a sweet sound emanating from a group of small bells. The weapons kept there like Shakti and Tomar were shining like electricity. 84.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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