श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  7.147.83 
अश्वैर्वातजवैर्युक्तं हेमभाण्डपरिच्छदै:।
सैन्धवैरिन्दुसंकाशै: सर्वशब्दातिगैर्दृढै:॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
वह रथ सिंधी घोड़ों द्वारा खींचा जाता था, स्वर्ण-आभूषणों से सुसज्जित, वायु के समान वेगवान, समस्त सीमाओं को पार करने में समर्थ, बलवान तथा चन्द्रमा के समान श्वेत था।
 
That chariot was drawn by Sindhi horses, adorned with golden ornaments, as swift as the wind, capable of crossing all boundaries, strong and as white as the moon. 83
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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