श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  7.147.82 
आयसै: काञ्चनैश्चापि पट्टै: संनद्धकूबरम्।
तारासहस्रखचितं सिंहध्वजपताकिनम्॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
उसका कूबड़ लोहे और सोने की पट्टियों से मज़बूत था। उसमें हज़ारों तारे जड़े हुए थे। उसके झंडों और पताकाओं पर सिंह का चिह्न अंकित था। 82.
 
Its hump was well-fortified with iron and gold plates. Thousands of stars were embedded in it. Its flags and banners had the symbol of a lion. 82.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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