श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  7.147.81 
संजय उवाच
शृणु राजन् यथावृत्तं रथमन्यं महामति:।
दारुकस्यानुजस्तूर्णं कल्पनाविधिकल्पितम्॥ ८१॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "हे राजन! पूरी कथा यथार्थ रूप में सुनो। दारुक का एक छोटा भाई था जो बड़ा बुद्धिमान था। वह तुरन्त ही रथ के समान सजा हुआ दूसरा रथ ले आया।"
 
Sanjaya said, "O King! Listen to the whole story in its true form. Daruk had a younger brother who was very intelligent. He immediately brought another chariot decorated in the same manner as a chariot. 81.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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