श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  7.147.67 
तत: पर्याकुलं सर्वं न प्राज्ञायत किंचन।
तथा सात्यकिना वीरे विरथे सूतजे कृते॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
जब सात्यकि ने वीर सारथी पुत्र कर्ण को रथहीन कर दिया, तब सारी सेना चारों ओर से व्याकुल हो गई। किसी को कुछ भी सूझ नहीं रहा था।
 
When Satyaki rendered the brave charioteer's son Karna chariotless, the entire army was perturbed from all sides. No one could think of anything. 67.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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