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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय
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श्लोक 58
श्लोक
7.147.58
प्रममाथ शिने: पौत्रं कर्ण: सायकवृष्टिभि:।
अमृष्यमाणो निधनं कौरव्यजलसंधयो:॥ ५८॥
अनुवाद
भूरिश्रवा और जलसंध का वध कर्ण को सहन न होने के कारण उसने अपने बाणों की वर्षा से शिनि के पौत्र सात्यकि को भी मार गिराया ॥58॥
Due to Karna not tolerating the killing of Bhurishrava and Jalsandha, he thrashed Satyaki, the grandson of Shini, with the rain of his arrows. 58॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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