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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय
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श्लोक 51-52h
श्लोक
7.147.51-52h
नैव दैवं न गान्धर्वं नासुरं न च राक्षसम्॥ ५१॥
तादृशं भुवि नो युद्धं दिवि वा श्रुतमित्युत।
अनुवाद
महाराज! देवताओं, गन्धर्वों, असुरों और राक्षसों के बीच ऐसा युद्ध मैंने न तो इस पृथ्वी पर और न ही स्वर्ग में कभी सुना है।
King! I have never heard of such a battle between the Gods, Gandharvas, Asuras and demons either on this earth or in heaven. 51 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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