श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  7.147.44-45h 
सात्यकिं विरथं दृष्ट्वा कर्णं चाभ्युद्यतं रणे॥ ४४॥
दध्मौ शङ्खं महानादमार्षभेणाथ माधव:।
 
 
अनुवाद
सात्यकि को रथहीन और कर्ण को युद्ध के लिए तैयार देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने ऋषभ शब्द के समान घोर शंख बजाया ॥44 1/2॥
 
Seeing Satyaki chariotless and Karna ready for war, Lord Krishna blew a loud conch with the sound of Rishabh. 44 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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