श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.147.39 
संजय उवाच
हन्त ते वर्तयिष्यामि यथा वृत्तं महारणे।
शुश्रूषस्व स्थिरो भूत्वा दुराचरितमात्मन:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "हे राजन! मैं आपको उस महायुद्ध में घटित हुई घटनाओं का वर्णन बड़े खेद के साथ करूँगा। कृपया शान्त होकर अपने दुष्कर्मों का परिणाम सुनिए।"
 
Sanjaya said, "O King! I will narrate to you with great regret the events that happened in that great war. Please be calm and listen to the consequences of your misdeeds."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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