श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.147.38 
सात्यकिश्चापि विरथ: कं समारूढवान् रथम्।
चक्ररक्षौ च पाञ्चाल्यौ तन्ममाचक्ष्व संजय॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
संजय! सात्यकि भी रथहीन हो गए थे। वे किस रथ पर सवार थे और चक्ररक्षक युधमन्यु तथा उत्तमौजा नामक दो पांचाल योद्धाओं ने किससे युद्ध किया था? यह सब मुझे बताओ।
 
Sanjay! Satyaki too had become chariotless. On which chariot did he ride and with whom did the two Panchala warriors, the chakra-guard Yudhmanyu and Uttamauja, fight? Tell me all this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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