श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.147.37 
धृतराष्ट्र उवाच
योऽसौ कर्णेन वीरस्य वार्ष्णेयस्य समागम:।
हते तु भूरिश्रवसि सैन्धवे च निपातिते॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! भूरिश्रवा के मारे जाने और सिन्धुराज के पराजित हो जाने पर वीर सात्यकि और कर्ण का युद्ध किस प्रकार हुआ?॥ 37॥
 
Dhritarashtra asked - Sanjaya! After Bhurishrava was killed and Sindhuraja was defeated, how was the battle between the brave Satyaki and Karna?॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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