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श्लोक 7.147.37  |
धृतराष्ट्र उवाच
योऽसौ कर्णेन वीरस्य वार्ष्णेयस्य समागम:।
हते तु भूरिश्रवसि सैन्धवे च निपातिते॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! भूरिश्रवा के मारे जाने और सिन्धुराज के पराजित हो जाने पर वीर सात्यकि और कर्ण का युद्ध किस प्रकार हुआ?॥ 37॥ |
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| Dhritarashtra asked - Sanjaya! After Bhurishrava was killed and Sindhuraja was defeated, how was the battle between the brave Satyaki and Karna?॥ 37॥ |
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