श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  7.147.32-33h 
एवमुक्तो महाबाहु: केशव: सव्यसाचिना॥ ३२॥
प्रत्युवाच महातेजा: कालयुक्तमिदं वच:।
 
 
अनुवाद
सव्यसाची अर्जुन की यह बात सुनकर महाबली केशव ने उनसे यह समयोचित वचन कहा-॥
 
On hearing this from Savyasachi Arjun, the mighty powerful Keshav said to him this timely word -॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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