श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.147.29-30h 
उपायान्तं तु राधेयं दृष्ट्वा पार्थो महारथ:॥ २९॥
प्रहसन् देवकीपुत्रमिदं वचनमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
राधापुत्र को अपने पास आते देख महारथी कुन्तीकुमार अर्जुन ने हंसते हुए देवकीनन्दन श्रीकृष्ण से कहा- 29 1/2॥
 
Seeing Radha's son coming near him, the great warrior Kuntikumar Arjun said laughingly to Devkinandan Shri Krishna - 29 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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