श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  7.147.28-29h 
तमापतन्तं राधेयमर्जुनस्य रथं प्रति॥ २८॥
पाञ्चाल्यौ सात्यकिश्चैव सहसा समुपाद्रवन्।
 
 
अनुवाद
राधापुत्र कर्ण को अर्जुन के रथ की ओर आते देखकर पांचाल के दो राजकुमार (युधामन्यु और उत्तमौजा) तथा सात्वतवंशी सात्यकि सहसा उसकी ओर दौड़ पड़े। 28 1/2॥
 
Seeing Radha's son Karna coming towards Arjun's chariot, the two Panchal princes (Yudhamanyu and Uttamauja) and Satyaki of Satvatavanshi suddenly ran towards him. 28 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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