श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.147.27-28h 
तथा विलपमाने तु सव्यसाचिनि तं प्रति॥ २७॥
सैन्धवं निहतं दृष्ट्वा राधेय: समुपाद्रवत्।
 
 
अनुवाद
जब सव्यसाची अर्जुन कृपाचार्य के लिये विलाप कर रहे थे, तभी राधानन्दन कर्ण ने सिन्धुराज को मारा हुआ देखकर उन पर आक्रमण कर दिया। 27 1/2.
 
While Savyasachi Arjun was lamenting for Krupacharya, Radhanandan Karna, seeing Sindhuraja killed, attacked him. 27 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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