श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  7.147.22-23h 
ये च विद्यामुपादाय गुरुभ्य: पुरुषाधमा:॥ २२॥
घ्नन्ति तानेव दुर्वृत्तास्ते वै निरयगामिन:।
 
 
अनुवाद
जो दुष्ट मनुष्य गुरु से ज्ञान प्राप्त करके उन पर आक्रमण करते हैं, वे दुष्ट मनुष्य अवश्य ही नरक में जाते हैं॥ 22 1/2॥
 
Those wicked men who, after receiving knowledge from their Guru, attack him, those wicked men surely go to hell.॥ 22 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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