श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  7.147.2-3 
संजय उवाच
सैन्धवं निहतं दृष्ट्वा रणे पार्थेन भारत।
अमर्षवशमापन्न: कृप: शारद्वतस्तत:॥ २॥
महता शरवर्षेण पाण्डवं समवाकिरत्।
द्रौणिश्चाभ्यद्रवद् राजन् रथमास्थाय फाल्गुनम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- भरतनन्दन! रणभूमि में अर्जुन द्वारा सिन्धुराज को मारा गया देख, शरद्वान के पुत्र कृपाचार्य अमराशा के प्रभाव से भारी बाणों की वर्षा करके पाण्डुपुत्र अर्जुन को आच्छादित करने लगे। राजन! द्रोणपुत्र अश्वत्थामा ने भी रथ पर बैठे हुए अर्जुन पर आक्रमण किया। 2-3॥
 
Sanjay said- Bharatnandan! Seeing the king of Sindhu killed by Arjuna in the battlefield, Sharadvan's son Kripacharya, under the influence of Amarsha, started covering Arjuna, the son of Pandu, by showering heavy arrows. Rajan! Drona's son Ashwatthama also attacked Arjuna sitting on the chariot. 2-3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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