श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 147: अर्जुनके बाणोंसे कृपाचार्यका मूर्च्छित होना, अर्जुनका खेद तथा कर्ण और सात्यकिका युद्ध एवं कर्णकी पराजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.147.1 
धृतराष्ट्र उवाच
तस्मिन् विनिहते वीरे सैन्धवे सव्यसाचिना।
मामका यदकुर्वन्त तन्ममाचक्ष्व संजय॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! जब वीर सिंधुराज सव्यसाची अर्जुन द्वारा मारे गए, तब मेरे पुत्रों ने क्या किया? यह बताओ।
 
Dhritarashtra asked - Sanjay! What did my sons do when the brave Sindhuraj was killed by Savyasachi Arjun? Tell me this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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