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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  7.146.92 
मुक्तकेशा विकवचा: क्षरन्त: क्षतजं क्षतै:।
प्रापलायन्त संत्रस्तास्त्यक्त्वा रणशिरो जना:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
लोगों के बाल झड़ गए थे, कवच गिर गए थे और वे भयभीत होकर युद्धभूमि से प्राण बचाने के लिए भाग रहे थे, उनके घावों से रक्त बह रहा था॥ 92॥
 
People's hair was loose, their armour had fallen off and they were terrified and running away from the battlefront to save their lives, with blood oozing from their wounds.॥ 92॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)