श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  7.146.86 
ते शरैर्भिन्नमर्माण: सैनिका: पार्थचोदितै:।
बभ्रमुश्चस्खलु: पेतु: सेदुर्मम्लुश्च भारत॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
भारत! अर्जुन के छोड़े हुए बाणों से जिनके प्राण छिद गए थे, वे सैनिक भटक रहे थे, लड़खड़ा रहे थे, गिर रहे थे, व्यथित हो रहे थे, प्राणहीन और मलिन हो रहे थे॥ 86॥
 
Bhaarat! Those soldiers whose vital organs were pierced by the arrows shot by Arjuna, were wandering, stumbling, falling, getting distressed and becoming lifeless and dirty.॥ 86॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd