श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 74-75
 
 
श्लोक  7.146.74-75 
कृपं विव्याध विंशत्या कर्णं पञ्चाशता शरै:॥ ७४॥
शल्यं दुर्योधनं चैव षड्‍‍भि: षड्‍‍भिरताडयत्।
वृषसेनं तथाष्टाभि: षष्ट्या सैन्धवमेव च॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कृपाचार्य पर बीस बाण, कर्ण पर पचास बाण, शल्य और दुर्योधन पर छः-छः बाण चलाये तथा वृषसेन को आठ बाणों से तथा सिन्धुराज जयद्रथ को साठ बाणों से घायल कर दिया ॥74-75॥
 
He shot twenty arrows at Kripacharya, fifty arrows at Karna and six arrows each at Shalya and Duryodhana. He also wounded Vrishasena with eight arrows and Sindhuraj Jayadratha with sixty arrows. 74-75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)