श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 48-49
 
 
श्लोक  7.146.48-49 
विव्याध च चतु:षष्ट्या शराणां नतपर्वणाम्॥ ४८॥
सैन्धवाभिमुखं यान्तं योधा: सम्प्रेक्ष्य पाण्डवम्।
न्यवर्तन्त रणाद् वीरा निराशास्तस्य जीविते॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
और भी उसने मुड़ी हुई गांठों वाले चौसठ बाणों से उसे घायल कर दिया। पाण्डुपुत्र अर्जुन को सिन्धुराज के सामने जाते देख हमारे पक्ष के वीर योद्धा अपने प्राणों से निराश होकर युद्ध से विमुख हो गये ॥48-49॥
 
Also, he wounded him with sixty-four arrows having bent knots. Seeing Arjuna, son of Pandu, going in front of Sindhuraj, the valiant warriors of our side, despairing of his life, retired from the battle. ॥ 48-49॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd