Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.146.4-5h: महाराज! उस समय अर्जुन की अद्भुत चपलता के कारण हम यह नहीं देख पाते थे कि वह कब बाण निकालता है, कब धनुष पर चढ़ाता है, कब धनुष खींचता है और कब बाण छोड़ता है। | mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आददानं महाराज संदधानं च पाण्डवम्॥ ४॥
उत्कर्षन्तं सृजन्तं च न स्म पश्याम लाघवात्।
अनुवाद
महाराज! उस समय अर्जुन की अद्भुत चपलता के कारण हम यह नहीं देख पाते थे कि वह कब बाण निकालता है, कब धनुष पर चढ़ाता है, कब धनुष खींचता है और कब बाण छोड़ता है।
Maharaj! At that time due to Arjun's amazing agility we were not able to see when he would take out the arrow, when he would place it on the bow, when he would pull the bow and when he would release the arrow. 4 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥