vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध
»
श्लोक 135
श्लोक
7.146.135
हतं जयद्रथं दृष्ट्वा तव पुत्रा नराधिप।
दु:खादश्रूणि मुुमुचुर्निराशाश्चाभवन् जये॥ १३५॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जयद्रथ को मारा गया देखकर आपके पुत्र दुःख से रोने लगे और अपनी विजय की आशा खो बैठे।
O Lord of men! On seeing Jayadratha killed, your sons began to cry in sorrow and lost hope of their victory. 135.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×