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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  7.146.133 
पश्चाज्ज्ञातं महीपाल तव पुत्रै: सहानुगै:।
वासुदेवप्रयुक्तेयं मायेति नृपसत्तम॥ १३३॥
 
 
अनुवाद
हे महाराज! हे महीपाल! बाद में आपके पुत्रों और सेवकों को ज्ञात हुआ कि यह अंधकार भगवान श्रीकृष्ण द्वारा फैलाया गया भ्रम था। (133)
 
O great king! O Mahipal! Later, your sons and their servants came to know that this darkness was an illusion spread by Lord Krishna. 133.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)