श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  7.146.128 
तस्योत्सङ्गे निपतितं शिरस्तच्चारुकुण्डलम्।
वृद्धक्षत्रस्य नृपतेरलक्षितमरिंदम॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
शत्रुराज ! कुण्डलों से विभूषित जयद्रथ का वह सुन्दर सिर राजा वृद्धक्षत्र की गोद में उनके देखे बिना ही गिर पड़ा ॥128॥
 
Enemy King! That beautiful head of Jayadratha adorned with earrings fell into the lap of King Vridhakshatra without him seeing it. 128॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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