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mahabharat 7.146.119: हे इन्द्रकुमार! सम्पूर्ण त्रिलोकी में ऐसा कोई कार्य नहीं है जो तुम्हारे लिए असम्भव हो अथवा जिसे तुम पूरा न कर सको ॥119॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 119
 
 
श्लोक  7.146.119 
न ह्यसाध्यमकार्यं वा विद्यते तव किंचन।
समस्तेष्वपि लोकेषु त्रिषु वासवनन्दन॥ ११९॥
 
 
अनुवाद
हे इन्द्रकुमार! सम्पूर्ण त्रिलोकी में ऐसा कोई कार्य नहीं है जो तुम्हारे लिए असम्भव हो अथवा जिसे तुम पूरा न कर सको ॥119॥
 
O Indrakumar! There is no task in the entire Triloki which is impossible for you or which you cannot accomplish.'॥ 119॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)