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mahabharat 7.146.113: ऐसा कहकर समय आने पर वृद्धक्षत्र ने जयद्रथ को राज्य के सिंहासन पर बिठाया और स्वयं वन में जाकर घोर तपस्या में लग गए ॥113॥   |   mahabharat अध्याय 7.146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  7.146.113 
एवमुक्त्वा ततो राज्ये स्थापयित्वा जयद्रथम्।
वृद्धक्षत्रो वनं यातस्तपश्चोग्रं समास्थित:॥ ११३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर समय आने पर वृद्धक्षत्र ने जयद्रथ को राज्य के सिंहासन पर बिठाया और स्वयं वन में जाकर घोर तपस्या में लग गए ॥113॥
 
Having said this, when the time came, Vridhakshatra installed Jayadratha on the throne of the kingdom and he himself went into the forest and engaged in severe penance. 113॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)