vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 146: अर्जुनका अद्भुत पराक्रम और सिन्धुराज जयद्रथका वध
»
श्लोक 106
श्लोक
7.146.106
वृद्धक्षत्र: सैन्धवस्य पिता जगति विश्रुत:।
स कालेनेह महता सैन्धवं प्राप्तवान् सुतम्॥ १०६॥
अनुवाद
सिंधुराज के पिता वृद्धक्षत्र इस जगत् में प्रसिद्ध हैं। बहुत समय के बाद उन्होंने इस सिन्धुराज जयद्रथ को अपना पुत्र स्वीकार किया। 106॥
Sindhuraj's father Vridhakshatra is famous in this world. After a long time, he accepted this Sindhuraj Jayadratha as his son. 106॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×