| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 7.145.9  | दुर्योधनश्च कर्णश्च वृषसेनोऽथ मद्रराट्।
अश्वत्थामा कृपश्चैव स्वयमेव च सैन्धव:॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | दुर्योधन, कर्ण, वृषसेन, मद्रराज शल्य, अश्वत्थामा, कृपाचार्य और स्वयं सिन्धुराज जयद्रथ- ये सभी युद्ध के लिये डट गये। 9॥ | | | | Duryodhana, Karna, Vrishasena, Madraraj Shalya, Ashwatthama, Kripacharya and Sindhuraj Jayadratha himself – all of them stood firm for the war. 9॥ | | ✨ ai-generated | | |
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