|
| |
| |
श्लोक 7.145.79-80  |
ततो दुर्योधनो राजंस्तावकानभ्यभाषत॥ ७९॥
यत्नाद् रक्षत राधेयं नाहत्वा समरेऽर्जुनम्।
निवर्तिष्यति राधेय इति मामुक्तवान् वृष:॥ ८०॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| राजन! तत्पश्चात् दुर्योधन ने आपके सैनिकों से कहा- 'वीरों! तुम लोग पूरी शक्ति से राधापुत्र कर्ण की रक्षा करो। वह अर्जुन को मारे बिना युद्धभूमि से नहीं लौटेगा; क्योंकि उसने मुझसे भी यही बात कही है।' |
| |
| King! Thereafter Duryodhan said to your soldiers-'Heroes! You protect Radha's son Karna with all your efforts. He will not return from the battlefield without killing Arjuna; because he has told me the same thing.' |
| ✨ ai-generated |
| |
|