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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 78-79h
 
 
श्लोक  7.145.78-79h 
प्रेक्षणीयौ चाभवतां सर्वयोधसमागमे।
प्रशस्यमानौ समरे सिद्धचारणपन्नगै:॥ ७८॥
अयुध्येतां महाराज परस्परवधैषिणौ।
 
 
अनुवाद
वे दोनों समस्त योद्धाओं की उस सभा में दिखाई दे रहे थे। महाराज! सिद्धों, चारणों और नागों द्वारा स्तुति करते हुए कर्ण और अर्जुन रणभूमि में एक-दूसरे को मारने की इच्छा से युद्ध कर रहे थे।
 
Both of them were visible in that gathering of all the warriors. Maharaj! Karna and Arjun were fighting with the desire to kill each other in the battlefield while being praised by Siddhas, Charanas and Nagas. 78 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)