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mahabharat 7.145.45-46h: श्रीकृष्ण और अर्जुन को मारने की इच्छा से उसने सिंधुराज जयद्रथ को पीछे धकेल दिया और सूर्यास्त की प्रतीक्षा करने लगा। उस समय सूर्य लाल हो गया था।   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  7.145.45-46h 
सैन्धवं पृष्ठत: कृत्वा जिघांसन्तोऽच्युतार्जुनौ॥ ४५॥
सूर्यास्तमनमिच्छन्तो लोहितायति भास्करे।
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण और अर्जुन को मारने की इच्छा से उसने सिंधुराज जयद्रथ को पीछे धकेल दिया और सूर्यास्त की प्रतीक्षा करने लगा। उस समय सूर्य लाल हो गया था।
 
With the desire to kill Shri Krishna and Arjun, he pushed back Sindhuraj Jayadratha and waited for the sunset. At that time the sun turned red. 45 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)