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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  7.145.38-39h 
कक्षमग्निरिवोद्‍धूत: प्रदहंस्तव वाहिनीम्॥ ३८॥
अचिरेण महीं पार्थश्चकार रुधिरोत्तराम्।
 
 
अनुवाद
जैसे प्रचण्ड अग्नि घास-फूस से भरे हुए वन को जला डालती है, उसी प्रकार अर्जुन ने आपकी सेना को जलाकर थोड़े ही समय में भूमि को रक्त से भिगो दिया।
 
Just as a raging fire burns down a forest full of grass and grass, similarly Arjuna burned down your army and in a short time drenched the ground with blood. 38 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)