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mahabharat 7.145.31-32h: पुरुषसिंह! आज मैं अपने पुरुषार्थ पर भरोसा करके तुम्हारे हित के लिए अर्जुन के साथ युद्ध करूँगा। विजय प्राप्ति तो ईश्वर पर निर्भर है। 31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.145.31-32h 
अद्य योत्स्येऽर्जुनमहं पौरुषं स्वं व्यपाश्रित:॥ ३१॥
त्वदर्थे पुरुषव्याघ्र जयो दैवे प्रतिष्ठित:।
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! आज मैं अपने पुरुषार्थ पर भरोसा करके तुम्हारे हित के लिए अर्जुन के साथ युद्ध करूँगा। विजय प्राप्ति तो ईश्वर पर निर्भर है। 31 1/2॥
 
Purush Singh! Today, relying on my efforts, I will fight with Arjun for your benefit. Attainment of victory is dependent on God. 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)