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mahabharat 7.145.30-31h: महाराज! आज आपको प्रसन्न करने के लिए मैं युद्धभूमि में सिंधुराज की रक्षा हेतु यथाशक्ति प्रयत्न करूँगा। विजय भगवान के हाथ में है।'   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.145.30-31h 
सैन्धवार्थे परं यत्नं करिष्याम्यद्य संयुगे॥ ३०॥
त्वत्प्रियार्थं महाराज जयो दैवे प्रतिष्ठित:।
 
 
अनुवाद
महाराज! आज आपको प्रसन्न करने के लिए मैं युद्धभूमि में सिंधुराज की रक्षा हेतु यथाशक्ति प्रयत्न करूँगा। विजय भगवान के हाथ में है।'
 
‘Maharaj! Today, to please you, I will do my best to protect Sindhuraj on the battlefield. Victory is in the hands of God. 30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)