Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.145.29-30h: कुरुनन्दन! मैं वही करूँगा जो एक धर्मात्मा पुरुष को करना चाहिए जो सदैव अपने मित्र का हित चाहता है। विजय की प्राप्ति भगवान पर निर्भर है। 29 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 145: अर्जुनका जयद्रथपर आक्रमण, कर्ण और दुर्योधनकी बातचीत, कर्णके साथ अर्जुनका युद्ध और कर्णकी पराजय तथा सब योद्धाओंके साथ अर्जुनका घोर युद्ध  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  7.145.29-30h 
यत्तु भक्तिमता कार्यं सततं हितकाङ्क्षिणा॥ २९॥
तत् करिष्यामि कौरव्य जयो दैवे प्रतिष्ठित:।
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! मैं वही करूँगा जो एक धर्मात्मा पुरुष को करना चाहिए जो सदैव अपने मित्र का हित चाहता है। विजय की प्राप्ति भगवान पर निर्भर है। 29 1/2॥
 
Kurunandan! I will do what a devout man who always wants the welfare of his friend should do. Attainment of victory is dependent on God. 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)