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श्लोक 7.145.13  |
अल्पावशेषो दिवसो नृवीर
विघातयस्वाद्य रिपुं शरौघै:।
दिनक्षयं प्राप्य नरप्रवीर
ध्रुवो हि न: कर्ण जयो भविष्यति॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| नरवीर! अब दिन का थोड़ा ही भाग शेष रह गया है। तुम अपने बाणों से शत्रु को पीड़ा पहुँचाओ और उसके कार्य में बाधा डालो। हे मनुष्यलोक के वीर कर्ण! दिन समाप्त होने पर हम अवश्य विजयी होंगे॥13॥ |
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| ‘Narveer! Only a little part of the day is remaining now. You should hurt the enemy with your arrows and obstruct his work. O brave Karna of the world of humans! We will certainly be victorious when the day ends.॥ 13॥ |
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